पर्यावरण से प्रेम करो..

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मैंने पहले नारा दिया ‘हरा भरा गोंडा’ और इन वाक्यों को काफी हद तक पूरा करके दिखाया। गोंडा के अलावा आसपास के सभी जिलों में अब तक 5 लाख से अधिक पेड़ हम स्वयं लगा चुके हैं। चूंकि बचपन से प्रकृति से हमको विशेष लगाव रहा है। 50 लाख पेड़ अब तक ये अपनी प्रेरणा से लोगों से, कार्यकर्ताओं से लगवा चुके हैं। हमने सोचा क्यों ना कुछ नया करे पेड़ लगवाने का बड़ा ही अनूठा अंदाज हमको सुझा। कार्यकर्ताओ से हम कहने लगे  कि कल आपके घर चाय पर आएंगे और अपने परिवार के साथ पेड़ लगाने को आप तैयार रहना।
घर घर जाकर वृक्षारोपण की इस मुहिम को दिन-प्रतिदिन आगे बढती जा रही है हम 50,000 से अधिक पेड़ प्रतिवर्ष बाँटते हैं। यही वजह है कि पूर्वांचल की जिस बंजर ज़मीन पर कीकड़ हुआ करती थी, आज वहां लाखों की तादाद में प्रकृति प्रेमी प्रकृति को बचाने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इस मिशन में 51 संस्थाएं हमारा साथ दे रही हैं।
हम मानते हैं कि वृक्ष न केवल धरती को उपजाऊ बनाते हैं, बल्कि हमारे जीवन में भी चैतन्यता उत्पन्न करते हैं। यदि हम अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा करना चाहते हैं तो हमें न केवल अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए, बल्कि उनका पालन-पोषण और रक्षण भी करना चाहिए। आज हमारे देवीपाटन मंडल वासियों की प्रेरणा से ये मुहीम आगे बढ़ रही है..मै अपने  देश के युवाओ का आव्हान करता हू की हम हर दिन एक नया पेड़ लगाये उनका पालन पोषण और रक्षण करे

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