(भैस का बच्चा) पड़िया वितरण पूर्वांचल की दुग्ध क्रांति की शरुआत….

भारतवर्ष में स्थित मेरा पूर्वांचल  कृषि प्रधान है। यहाँ के अधिकतर किसान, खेत तथा पशुधन पर आश्रित है। पिछले कुछ वर्षो में हरित क्रांति के माध्यम से देश में पैदावर के बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया गया तथा पिछले कुछ वर्षों में देश अन्न पैदावार में आत्मनिर्भर हो गया। कई प्रयास दूध उत्पादन में सुधार के भी कई बार हुए पर जन-मानस में जागरूकता के अभाव में प्रयासों को गति प्राप्त नहीं हो पायी। धरातल पर आने वाली कई समस्याओं की ओर पूरा ध्यान न होने के कारण प्रभावी ढंग से उसे लागू नहीं किया जा सका। इन सभी बातों को ध्यान में रखने के बाद देश के अंदर दूध उत्पादन क्षमता के विकास के लिए पड़िया वितरण कार्यक्रम की रूपरेखा बनायी गयी। आशा है इस बिलकुल नए पड़िया वितरण कार्यक्रम के कार्यान्वयन से न हमारे खेतिहर, भूमिहीन, गरीब किसान अपने आपको आत्मनिर्भर बना सकेंगे और कार्यक्रम से देश के प्रति व्यक्ति आय में काफी उछाल आने की सम्भावना है।

 

पड़िया वितरण योजना एक बहुत महत्वकांशी योजना है जिसके द्वारा न केवल आर्थिक रूप से ग्रामीण जनता को सम्पन्न कर सकते हैं बल्कि

शिक्षा एंव सामाजिक स्तर में भी सुधार लाया जा सकता है। देश व समाज के लिए स्वावलंबी होना मुख्य बात है। परम पूजनीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी समय समय पर अपने उद्गारो में जाहिर किया कि ऐसे कार्यक्रम बनाये जाये जो भारत वर्ष को आत्मनिर्भर बना सकें।

देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है एक स्थायी और वि‍त्तीय दृष्टि से व्यवहार्य पशुधन फार्मिंग की  जो व्यापर के माध्यम से धन और स्व-रोजगार पैदा करें। विशेष रूप से भूमि‍हीन मजदूरों, छोटे, मझोले किसानों तथा महिलाओं के लिए प्रयास है की इससे उनके परिवार की आय बढ़े। आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी के विकसित भारत के सपने को ध्यान में रखते हुए मैंने पूर्वांचल के अंतर्गत देवीपाटन मंडल में पड़िया स्वालंबन योजना लागू करने का प्रयास किया

सपना है की वर्तमान विकास तंत्र की संस्थागत पुन: राष्ट्रीय स्तर  पर इसी के प्रेरणा स्वरूप मैंने पूर्वांचल के अंतर्गत देवीपाटन मंडल में पड़िया स्वालंबन योजना लागू करने का प्रयास किया

जिससे दूध उत्पादन में क्रन्तिकारी सुधर आये और अपरोक्ष रूप से इस क्रांति के माध्यम से न केवल इस मंडल में ही नही पूरे  देश में रोजगार प्रदान करने के अलावा सभी को सुचारू रूप से दूध से निर्मित पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। इससे जुड़े सभी वन्यिकी पहलुओ की

जानकारी भी इस कार्यक्रम से प्रभावी रूप से समाज में आएगी जिसका उपयोग कर युवाशक्ति अपने कौशल विकास से चारो तरफ खुशियो का अम्बार बटोरने में सक्षम हो सकेगा ।

गोंडा में दुग्ध क्रांति की ओर बढ़ते तरबगंज ,गोंडा  में लगातार  पशु वितरण किया जा रहा है  मिशन ५ साल में 10,000 से अधिक परिवारों को स्वावलंबि बना कर अपने परिवार का भी स्वस्थ एवं आर्थिक मज़बूती देना है । लगभग २५०० से ऊपर परिवार को लाभ देकर यह रोज़ाना  नए कीर्तिमानो को छूती जा रही है वो भी बिना  किसी बाहरी यह सरकारी सहयता के ।
जय हिंद

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